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जाने कैसे प्राप्त कर सकते है आप धन अपने राशियों के अनुसार, ज्योतिष शास्त्र ! hindi.panditbooking.com/2016/06/dhan-kaise-prapt-kare/

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अगर सदैव आप धन के समस्या से जूझते रहते है व धन आपके पास रुकता नहीं या जिस समय आपको धन की अधिक आवश्यकता होती है आपके पास पर्याप्त धन नहीं होता है. यदि अक्सर ऐसी स्थिति से होकर आपको गुजरना पड़ता है तो आज हम को ज्योतिष शास्त्र से संबंधित, राशियों के आधार पर कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे है जो सदैव के लिए आपको इस समस्या से मुक्ति दिला सकता है.
धान प्राप्ति से जुड़े ज्योतिष उपाय :-
मेष राशि : –

 

1 . रात्रि के समय एक सफेद रंग के कपड़े को लाल रंग एव केसर से घिसकर रंगे तथा इसके बाद इस रंगे कपड़े को अपने गले अथवा तिजोरी में बिछाए. इस उपाय के द्वारा आपकी सम्रद्धि में सदैव वृद्धि होगी व आकस्मिक धन हानि का योग भी नहीं बनेगा.

2 . शाम के समय एक तेल सा भरा दीपक जलाए तथा इसमें दो काली गूंजा डाल दे व इसे घर के बाहर प्रवेश द्वार में रख दे. इस उपाय द्वारा आपको वर्ष भर में धन हानि से नहीं जूझना पड़ेगा. तथा रुका हुआ धन आपको शीघ्र ही प्राप्त होगा.

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अपने भक्त की रक्षा के लिए जब महादेव शिव को करना पडा भगवान श्री कृष्ण से युद्ध, जाने क्या हुआ इस भीषण hindi.panditbooking.com/2016/05/shiva-krishna-fight/

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महाप्रतापी एवं दैत्यराज बलि  के 100  पुत्र थे जिसमे उसके सबसे बड़े पुत्र का नाम वाणासुर था, वाणासुर बचपन से ही भगवान शिव का परम भक्त था जब वाणासुर बड़ा हुआ तो वह हिमालय पर्वत की उच्ची चोटियों पर भगवान शिव की तपस्या करने लगा. उसके कठिन तपस्या को देख भगवान शिव उससे प्रसन्न हुए तथा उसे सहस्त्रबाहु के साथ साथ अपार बलशाली होने का वरदान दिया. भगवान शिव के इस वरदान द्वारा वाणासुर अत्यन्त बलशाली हो गया कोई भी युद्ध में उसके आगे क्षण भर मात्र भी टिक नहीं सकता था. 

वाणासुर को अपने बल पर इतना अभिमान हो गया की उसने कैलाश पर्वत में जाकर भगवान शिव को युद्ध के लिए चुनौती दे दी. वाणासुर की इस मूर्खता को देख भगवान शिव क्रोध में आग बबूला हो गए परन्तु फिर अपने भक्त की इस मूर्खता को उन्होंने उसकी नादानी समझी और कहा अरे मुर्ख ! तेरे घमंड को चूर करने वाला उतपन्न हो चुका है, जब तेरे महल की ध्वजा गिरे तो समझ लेना की तेरा शत्रु आ चुका है. 

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महाभारत युद्ध सम्पात होने के पश्चात आखिर क्या हुआ ? जाने महाभारत से जुड़े इन टॉप 6 रहस्यों को ! hindi.panditbooking.com/2016/05/mahabharat-top-6-secrets/

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कुरुक्षेत्र में अनेको योद्धाओं के मध्य हुए महाभारत के भीषण युद्ध के बारे में तो हर कोई जानता होगा जिसमे पांडवो ने भगवान श्री कृष्ण की सहायता से कौरवों को पराजित किया था. लेकिन क्या आप जानते है जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तो क्या हुआ, तथा युधिस्ठर के राजा बनने के बाद उन्होंने कितने वर्षो तक राज्य किया व इसके बाद की क्या कहानी है ?
 
आइये आपको महाभारत के उन रोचक रहस्यों से अवगत कराते है जो शायद ही आपने पहले कभी पढ़े या सुने हो. 

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लंकापति रावण के पास थी 72 करोड़ की सेना फिर भी 8 दिन में ही समाप्त हो गया रामायण का युद्ध, रामायण के hindi.panditbooking.com/2016/05/ramayan-yudh-mysterious-facts/

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रामायण का युद्ध अश्विन पक्ष की तृतीया तिथि को आरम्भ हुआ था तथा 8 दिन तक चलने वाला यह भयंकर युद्ध प्रभु श्री राम ने दशहरे के दिन यानि दशमी को रावण के वध के साथ समाप्त किया. यदि आप सोचते है की रामायण का यह युद्ध सिर्फ रातो रात ही हो गया तो में आपको बता दू की वे राते इतनी लम्बी थी की जिसका अंदाजा आप और में नहीं लगा सकते ये तो सिर्फ देवता ही जानते है . 
इस बात का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है की लंका नरेश रावण के सेना की संख्या 72 ,0000000  ( बहत्तर करोड़ )  थी, इसके बाद भी प्रभु श्री राम ने वानरों की सेना के सहारे  केवल 8 दिनों में ही समस्त राक्षस सेना का अंत कर दिया था और रावण को पराजय का समाना करना पड़ा था. 

 

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अकेले ही 60 ,000 योद्धाओं को पल भर में मसल सकता था यह योद्धा, पिता जन्मे थे बाणों के साथ ! hindi.panditbooking.com/2016/05/kripacharya-unheard-story/

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महाभारत के आदिपर्व में एक ऐसे योद्धा की कथा मिलती है जो अद्भुत शक्तियों से सम्पन्न महाभारत के प्रमुख पात्रो में से एक था. महान ऋषि गौतम के पुत्र थे शरदवान जो अपने जन्म के समय ही बाण के साथ पैदा हुए थे जो यह सूचक था की वे एक वीर योद्धा थे. 
 
अपने पिता ऋषि गौतम के भाति शरद्वान का मन जप-तप में नहीं लगता था वे अपना अधिकत्तर समय धनुर्विद्या के अभ्यास में लगाते थे. उस समय उनके समकालीन कोई ऐसा योद्धा नहीं था जो उन्हें युद्ध की चुनौती दे. बड़े-बड़े योद्धाओं को युद्ध में उनसे पराजय का सामना करना पड़ा. यहाँ तक देवराज इंद्र भी उनकी धनुविर्द्या देख अचम्भित हो गए तथा उन्हें यह भय सताने लगा की कहि शरद्वान उनसे स्वर्गलोक ना छीन ले. 

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प्रभु श्री राम के हाथो हुआ था एक गन्धर्व कन्या का वध, लेकिन क्यों ? hindi.panditbooking.com/2016/05/shri-ram-story/

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हमारे हिन्दू धर्मिक ग्रंथो एवं शास्त्रों में महिलाओं को मारना एक घोर पाप कर्म बताया गया है, लेकिन फिर भी भगवान श्री राम के हाथो एक गन्धर्व महिला का वध हो गया था. परन्तु मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने ऐसा क्यों किया और आखिर कौन थी वह गन्धर्व महिला आइये जानते है इस सम्पूर्ण कथा को. 
 
बात उस समय की है जब ऋषि विश्वामित्र एक और बर्ह्माण्ड और स्वर्ग बनाने की चेष्टा में अपनी सभी दिव्य शक्तियां खो चुके थे, और उन शक्तियों के पुनः प्राप्ति के लिए वे घोर यज्ञ कर रहे थे. ऐसे में कुछ राक्षसों ने  उनके इस यज्ञ को भंग करने के लिए अनेको बार प्रयास किया. राक्षसों के इन हरकतों से ऋषि विश्वामित्र को अपने यज्ञ को सम्पन्न करने में बाधा उतपन्न हो रही थी. 

 

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आखिर क्यों दिए थे हनुमान जी ने भीम को अपने शरीर के तीन बाल, एक अनसुनी कथा ! hindi.panditbooking.com/2016/05/bheem-hanuman-unheard-story/

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महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था तथा इस युद्ध में पांडवो ने कौरवों पर विजयी प्राप्त कर ली थी. पांडव हस्तिनापुर में खुसी-खुसी अपने दिन काट रहे थे तथा प्रजा को भी राजा युधिस्ठर के रहते किसी चीज की कमी नहीं थी. एक दिन देवऋषि नारद मुनि महाराज युधिस्ठर के सामने प्रकट हुए और कहा यहाँ आप तो खुस लग रहे पर क्या आप को पता है की स्वर्गलोक में आपके पिता बहुत दुखी है.

जब युधिस्ठर ने देवऋषि से इसका कारण पूछा तो वह बोले पाण्डु अपने जीते जी राजसूय यज्ञ कराना चाहते थे जो वे न कर सके इसी बात को लेकर वे दुखी रहते है. महाराज युधिस्ठर ! आपको आपके पिता के आत्मा के शांति के लिए यह यज्ञ करवाना चाहिए.

 

तब नारद ऋषि के परामर्श पर तथा अपने पिता के आत्मा की शांति के लिए युधिस्ठर ने राजसूय यज्ञ करवाया , तथा इसकी भव्यता के लिए उन्होंने भगवान शिव के परम भक्त ऋषि पुरुष मृगा को आमंत्रित करने का फैसला लिया. ऋषि पुरुष मृगा जैसा की उनका नाम था वे अपने नाम के समान ही जन्म से आधे पुरष शरीर के थे तथा निचे से उनका पैर मृग का था.

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जब यमराज के एक भूल ने बना दिया महादेव शिव को ”कालांतक” ! www.mereprabhu.com/2016/05/%E0%A4%9C%E0%A4%AC-%E0%A4%AF%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF/

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मह्रिषी भृगु के परिवार में जन्म लेने वाले महान ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव और ब्र्ह्मा को अपना आराध्य देव मानते थे. मह्रिषी मार्कण्डेय का जिक्र विभिन्न पुराणों में कई बार किया गया है. ऋषि मार्कण्डेय और संत जैमनी के बीच हुए संवाद के आधार पर ही प्रसिद्ध ग्रन्थ मार्कण्डेय पुराण के स्थापना हुई.

प्रसिद्ध धार्मिक ग्रन्थ भगवत पुराण भी मार्कण्डेय ऋषि के अनेको प्रार्थनाओं तथा उपदेशों पर आधारित है.मार्कण्डेय ऋषि का संपूर्ण जीवन अपने आप में एक शिक्षा है, इनके बारे में बहुत सी बातें हम सुनते-कहते आए हैं. यहां हम आपको उनके जीवन से जुड़ी एक ऐसी घटना के बारे में बताएंगे, जिनसे शायद आप अवगत नहीं हैं.

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जब स्वयं महादेव शिव भी नहीं बच पाए अपने शिष्य शनिदेव की दृष्टि से, पुराणों की एक रोचक कथा ! hindi.panditbooking.com/2016/05/story-shiva-shani-dev/

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हिन्दू धर्म गर्न्थो और शास्त्रों में  भगवान शिव को शनि देव का गुरु बताया गया है तथा शनिदेव को न्याय करने और किसी को दण्डित करने की शक्ति भगवान शिव के आशीर्वाद द्वारा ही प्राप्त हुई है अर्थात शनि देव किसी भी चाहे वह देवता हो या असुर, मनुष्य हो या कोई जानवर सभी को उनके कर्मो के अनुसार उनके साथ न्याय कर सकते है और उन्हें दण्डित कर सकते है. 

 

शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव एवं देवी छाया के पुत्र शनि देव को क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गयी है. शनि देव बचपन में बहुत ही उद्ण्डत थे तथा पिता सूर्य देव ने उनकी इस उदंडता से परेशान होकर भगवान शिव को अपने पुत्र शनि को सही मार्ग दिखाने को कहा. 

 

भगवान शिव के लाख समझाने पर भी जब शनि देव की उदंडता में कोई परिवर्तन नहीं आया तो भगवान शिव ने शनि देव को सबक सिखाने के लिए उन पर प्रहार किया जिससे शनि देव को मूर्छा आ गई. इसके बाद पिता सूर्य देव के कहने पर भगवान शिव ने शनि देव की मूर्छा तोड़ी तथा शनि देव को अपना शिष्य बना लिया.  तथा उन्हें दण्डाधिकारी का आशीर्वाद दिया. इस प्रकार शनिदेव न्यायधीश के समान न्याय एवं दण्ड के कार्य में भगवान शिव का सहयोग करने लगे. 

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क्या द्रोपदी थी अभिमन्यु के वध का कारण ? जाने महाभारत की अनसुनी कहानी ! hindi.panditbooking.com/2016/05/draupadi-ttha-mahabharat-yudh/

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कुरुक्षेत्र के भूमि में लड़ी गयी महाभारत के युद्ध से तो हम सभी परिचित है. अपने बचपन के दिनों से ही हम पांडवो और कौरवों के मध्य हुए भीषण युद्ध के बारे में सुनते और पढ़ते आये है. महाभारत का युद्ध  पांडवो और कौरवों के बीच हस्तिनापुर के सम्राज्य को लेकर उनके बीच बिगड़ते  रिश्तों पर आधारित था. कौरवों के अंदर  अपने चचेरे भाइयो पांडवो के लिए पनप रही ईर्ष्या ही महाभारत जैसे भयंकर युद्ध का कारण बनी. 

 

वैसे तो लालच, ईर्ष्या, जलन आदि ने पांडवो और कौरवों को एक-दूसरे से अलग रख रखा था, परतु जब से पांडवो का विवाह पांचाल नरेश की राजकुमारी द्रोपदी से हुआ तब से पांडवो और कौरवों के मध्य कुछ ऐसे घटनाक्रम घटित हुए जिसने महाभारत जैसे भीषण युद्ध की नींव रख दी. 

 

महाभारत ग्रन्थ में बताई गई कई घटनाएं इस बात की ओर सपष्ट  संकेत करती है की कहीं न कहीं द्रोपदी के कारण ही अंतत:  कौरवों को उनके पापो की सजा मिला पायी और समस्त कौरवों का पांडवो द्वार महाभारत के युद्ध में अंत कर दिया गया. 

 

हम यह तो जानते है की द्रोपदी द्वारा  दुर्योधन का एक बार भरी सभा में अपमान किया था जिसके प्रतिशोध में दुर्योधन ने भी द्रोपदी का भरी सभा में चीरहरण किया था जो महाभारत के युद्ध के कारणों में से एक था. परन्तु बहुत सी अनेक घटनाएं भी ऐसी घटित हुई है की जो यह सिद्ध करती है की द्रोपदी ने भी महाभारत के युद्ध की बुन्याद रखी थी. अर्थात जहाँ पांडव और कौरव इस युद्ध के लिए जिम्मेदार थे  उतना ही द्रोपदी भी इस युद्ध के लिए कहीं न कहीं बराबर की उत्तरदायी थी. आइये जानते कौन सी वे ऐसी घटनाएं थी जो द्रोपदी को भी महाभारत के युद्ध का बराबर का जिम्मेदार बनाती है. 

 

1 .द्रोपदी से जुडी पहली घटना जिसने महाभारत युद्ध को अंजाम दिया था, जब इंद्रप्रस्थ राज्य में युवराज युधिस्ठर का राज्याभिषेक हो रहा था तब दुर्योधन भी उस अवसर पर इंद्रप्रस्थ पहुंचा था. इंद्रप्रस्थ के महल की रचना मयदानव ने की थी. उसने अपनी माया से उस महल की रचना इस प्रकार से की थी की कोई भी व्यक्ति वहां की हर चीजों से धोखा खा सकता था. दुर्योधन भी इसी चाल में आ गया और फर्श समझकर तालाब में गिर गया. तब दुर्योधन की उस दशा को देखकर द्रोपदी बहुत जोर से हसी और दुर्योधन पर व्यंग्य कस्ते हुए कहा की ”अंधे का पुत्र तो अंधा ही होता है” . उस समय दुर्योधन ने अपनी भरी सभा में हुए अपमान का बदला लेने का दृढ़निश्चय किया था. 

 

2 .इंद्रप्रस्थ में हुए अपने अपमान का बदला लेने के लिए दुर्योधन ने पांडवो को जुए के खेल के लिए आमंत्रित किया. तथा इस खेल में दुर्योधन ने अपने मामा शकुनि के मदद से पांडवो के साथ छल किया   और पांडवो का सारा राज्य जीत लिया. यहाँ तक की इस खेल में पांडव द्रोपदी का सम्मान भी हार गए. दुर्योधन अपने अपमान का बदला भुला नहीं था उसने भरी सभा में अपने भाई दुःशासन के हाथो द्रोपदी का चिर हरण करने का प्रयास किया. पांडवो सहित भीष्म, दोणाचार्य सभी मूक बने रहे कोई भी द्रोपदी का सम्मान बचा नहीं पाया. उस समय द्रोपदी ने यह प्रतिज्ञा ली थी की वह तब तक अपने खुले बालों को में जुड़ा नहीं करेगी जब तक वह दुःशासन के रक्त से अपने बाल धो ना ले. द्रोपदी की यही प्रतिज्ञा ने पांडवो को भी क्रोधित किया और यह भी महाभारत के युद्ध की ओर बढ़ा एक कदम साबित हुआ. 

 

3 .पांडव के एक चोपड़ का दाँव हारने के कारण उन्हें वनवास भी मिला था. इस वनवास के लिए जब पांडव वन की ओर जा रहे थे तब द्रोपदी भी उनके साथ गई. पांडव द्रोपदी को महल में ही रखना चाहते थे परन्तु द्रोपदी का पांडवो के साथ वनवास की लिए चलने का मुख्य कारण यह था की पांडव चाहे जिस हाल में भी रहे परन्तु उन्हें अपनी पत्नी का अपमान सदैव याद रखना होगा. अतः पांडवो को अपने अपमान का प्रतिशोध याद दिलाने के लिए द्रोपदी ने भी पांडवो के साथ वनवास को चुना. 

 

4 . जुए में जब अपना सब कुछ गवां कर पांडव वनवास काट रहे थे तभी एक दिन वन में शिकार को आये दुर्योधन के जीजा जयद्रथ की नजर द्रोपदी पर पड़ी. उसने द्रोपदी को अपने साथ रथ में महल ले जाने का दुशाहस किया. परन्तु पांचो पांडवो ने जयद्रथ को ऐसा करते देख लिया तथा उन्होंने उसे पकड़कर बंधी बना लिया. जब अर्जुन जयद्रध का वध करने के लिए आगे बढ़ा तो द्रोपदी ने अर्जुन को ऐसा करने से किसी तरह रोक लिया तथा जयद्रध का सर मुड़वाकर उसे पांच चोटी रखने की सजा दे दी. अब जयद्रध किसी को मुंह दिखाने के लायक नहीं रह गया था तथा अपने इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए जयद्रध ने महभारत युद्ध में चक्रव्यूह में फसे अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु का वध किया था. 

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इन 6 कारणों से हुआ था लंकापति रावण का ”सर्वनाश” ! hindi.panditbooking.com/2016/05/6-curses-behind-ravana-death/

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ऋषि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अनुसार रावण एक बहुत ही पराक्रमी एवं विद्वान योद्धा था. उसे अपने जीवन काल में अनेक शूरवीरों के साथ युद्ध किया तथा उन सभी युद्धों में उसने अकेले अपने बल पर विजयी हासिल करी. 
 
लेकिन इतने पराक्रमी होने के बाद भी रावण के जीवन में छः ऐसी घटनाएं घटित हुई, जो आगे चलकर रावण के मृत्यु का कारण बनी. रावण जैसे बुद्धिमान व्यक्ति के संबंध में कहा जाता है की जब रावण अपनी अंतिम साँसे ले रहा था तब उसकी विद्वानता के कारण स्वयं भगवान श्री राम ने अपने भाई लक्ष्मण को उससे ज्ञान लेने के लिए भेजा था. इस बात का उल्लेख रामायण में मिलता है. 
 
लंकापति रावण के मृत्य के छः कारण :-
 
1 . एक बार रावण भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत गया. कैलाश पर्वत के बाहर से भगवान शिव के वाहन नंदी पहरेदारी कर रहे थे. जब रावण ने नंदी जी को देखा तो वह जोर-जोर से हसने लगा. रावण ने नंदी के स्वरूप का मजाक उड़ाते हुए उन्हें बन्दर के मुंह वाला कह दिया. रावण के इस तरह नंदी को अपमानित करने पर नंदी क्रोध में आ गए 

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जाप पूजा के समय रहे इन कामो से दूर, अन्यथा करना पड सकता है भयंकर मुसीबतों का समाना ! hindi.panditbooking.com/2016/05/right-way-chant-jaap-mala/

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हमारे हिन्दू धर्म में अनेको धार्मिक कर्म-कांड करने का प्रचलन सदियों से निरंतर चले आ रहा है. हिन्दू धर्म में कई देवताओ की पूजा की जाती है, यहाँ लोग श्रद्धा पूर्वक अपने घर या मंदिरों में भगवान की पूजा, व्रत एवं जाप करते है. भगवान को स्मरण करने के लिए उनके नाम का ”जाप” हिन्दू धर्म में विशेष महत्ता रखता है. ऐसी मान्यता है की जाप के माध्यम से भक्त अपने आराध्य देवी-देवताओ को प्रसन्न करते है व मन मुताबिक़ वरदान प्राप्त करते है. 
 
जप के दौरान यदि कोई व्यक्ति किसी विशेष मन्त्र का उच्चारण करता है तो उस मन्त्र के उच्चारण के साथ-साथ उसके सही ध्वनि का होना भी उतना ही अत्यन्त आवश्यक है. आज हम आपको कुछ ऐसे बातो की बारे में बताने जा रहे है जिन्हे मंत्र जाप करते समय विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है अन्यथा आपको मन्त्र जाप के विपरीत प्रभाव को झेलना पड सकता है. 

 

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जाने आखिर क्यों भगवान शिव ने किया अपने ही भक्त और रावण के भाई ”कुम्भकर्ण” के पुत्र का वध ! hindi.panditbooking.com/2016/05/why-shiva-killed-kumbhakarna-son/

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अपने भाई लंकापति रावण के समान ही कुम्भकर्ण की भी शिव के प्रति अगाध श्रद्धा थी , ऋषि विश्रवा व कैकसी के दूसरे पुत्र के रूप में कुम्भकर्ण का जन्म हुआ था. राक्षस कुल में जन्म लेने के बावजूद भी कुम्भकर्ण में कोई अप्रवर्ति नहीं थी वह सदैव धर्म के मार्ग में चलने वाला व्यक्ति था उसकी यही विशेषता उसे राक्षस कुल के अन्य राक्षसों से अलग करती थी. कुम्भकर्ण के इस प्रताप को देखकर देवता भी उनसे जलते थे. 
 
रावण जब भगवान शिव की तपस्या करने बैठता था तो कुम्भकर्ण भी भाई विभीषण को साथ में लेकर शिव की तपस्या में लीन हो जाता था. रावण के हर धार्मिक कार्यो में कुम्भकर्ण उसके साथ होता था. राक्षस कुल में रावण के बाद भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त होने के बावजूद भी आखिर क्यों भगवान शिव कुम्भकर्ण के पुत्र का वध किया आइये विस्तार से जानते है इस कथा को :- 

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जानिए घर पर पूजा करने की सही विधि और उससे संबंधित 30 आवश्यक नियम ! hindi.panditbooking.com/2016/05/pooja-right-procedure-home/

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अपने परिवार में सुख और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी-देवताओ की पूजा करने की परम्परा अनेको वर्षो से निरंतर चली आ रही है तथा आज भी हम इस परम्परा को निभाते आ रहे है. भगवान की पूजा द्वारा हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. परन्तु हम सभी को पूजा करने से पूर्व कुछ ख़ास नियमों का पालन करना चाहिए तभी हमे पूजा का शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो पायेगा. 
हम आज आपको यहाँ ऐसे 30 नियम बताने जा रहे जो समान्य पूजन में भी आवश्यक है, तथा इन्हे अपनाकर आप पूजा से होने वाले शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त कर सकते हो. 
 
1 . शिव, दुर्गा, विष्णु, गणेश और सूर्यदेव ये पंचदेव कहलाते है इनकी पूजा हर कार्यो में अनिवार्य रूप से  की जानी चाहिए. प्रतिदिन पूजा करते समय इन पांच देवो का ध्यान करना चाहिए. ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का वास होता यही तथा समृद्धि आती है. 
 
2 .प्लास्टिक की बोतल में या किसी अन्य धातु के अपवित्र बर्तन में गंगा जल नहीं रखना चाहिए, लोहे अथवा एल्युमिनियम  के बर्तन अपवित्र धातु की श्रेणियों में आती है. गंगाजल को रखने के लिए ताम्बे का बर्तन उत्तम तथा पवित्र माना जाता है. 
 
3 . यदि घर में भगवान शिव, गणेश और भैरव जी की मूर्ति हो या आप मंदिर में इन तीनो देवताओ की पूजा करते हो तो ध्यान रहे की इन तीनो देवो पर तुलसी ना चढ़ाए अन्यथा पूजा का उल्टा प्रभाव पड़ता है. 

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जाने आखिर स्त्रियों के वे कौन से 8 अवगुण है जो महापंडित रावण ने मंदोदरी को बताए थे ! hindi.panditbooking.com/2016/05/ravana-revealed-women-negativ/

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लंकापति रावण रामायण का एक विशेष पात्र है, तथा वह महादेव शिव के प्रमुख भक्तो में से भी एक कहलाता है . हिन्दू धर्म ग्रंथो और शास्त्रों में बताया गया है की रावण में अनेको बुराइयाँ होने के साथ ही साथ उसमे कुछ अच्छाइयाँ भी थी. रावण महाज्ञानी एवं विद्वान था तथा वह अनेक शास्त्रों ग्रंथो एवं विद्या का ज्ञाता था. अगर रावण की बुराई की बात करें तो उसकी अन्य सभी बुराइयों में से के प्रमुख बुराई यह थी की वह स्त्रियों की ओर अति शीघ्र आकर्षित हो जाता था, उसके स्त्रियों की सुंदरता बहुत जल्द मोहित कर लेती थी. 
 
रावण किसी भी स्त्री की सुंदरता देख फिर उसे हर हाल में अपना बनना चाहता था. इसे कमजोरी कहे या फिर बुराई …………………….

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अमरनाथ गुफा से जुड़े इन रहस्यों को बहुत कम ही लोग जानते है ! hindi.panditbooking.com/2016/04/untold-story-amarnath/

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एक बार भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर बैठकर कुछ वार्तालाप कर रहे थे तभी कुछ सोचते हुए माता पार्वती ने महादेव शिव से पूछा की आप तो अजर है , अमर है फिर ऐसा क्यों है की  आप की अर्धांग्नी होने के बावजूद मुझे हर बार जन्म लेकर नए स्वरूप में आना पड़ता है, आपको प्राप्त करने के लिए बरसो कठिन तपस्या करनी पड़ती है. मुझे बताइए की आखिर आपको प्राप्त करने के लिए मेरी तपस्या और साधना इतनी कठिन क्यों ? तथा आपके कंठ में पड़ी इस नरमुंड माला और अमर होने का क्या रहस्य है. 

 

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जाने महादेव शिव के अनोखे स्वरूप नटराज का रहस्य ! hindi.panditbooking.com/2016/04/lord-nataraja-story/

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नटराज भगवान शिव के ही एक स्वरूप का नाम है जो न सिर्फ उनके सम्पूर्ण काल एवं स्थान को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह भी बिना किसी संशय स्थापित करता है की इस पुरे सृष्टि में सारा जीवन, उनके गति कम्पन तथा इस सृष्टि से भी परे शून्य की निशब्दता सब कुछ महादेव शिव और उनके नटराज स्वरूप में निहित है. 
 
भगवान शिव के नटराज स्वरूप के उतपत्ति  की  विषयक धारणा ” आनंदम तांडवम ” से जुडी हुई है. नटराज दो शब्दों के समावेश से मिलकर बना है नट (कला) और राज, यानि नटराज का अर्थ होता है नृत्य करने वालो का सम्राट या इस सृष्टि के सभी नृत्य करने वाले प्राणियों का नेतृत्वकर्ता. एक और अर्थ के अनुसार इस पुरे संसार में सर्जन और विनाश का जो निर्देशन करंता है वह भगवान शिव का स्वरूप नटराज है. 
 
शिव नटराज रूप में सभी कलाओं के आधार कहलाते है. शिव का तांडव नृत्य प्रसिद्ध है जिसके दो

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जब स्वयं महायोद्धा कर्ण ने दिया था कुरुक्षेत्र में गुप्त रूप से अर्जुन को जीवनदान, एक अनुसनी कथा ! hindi.panditbooking.com/2016/04/karna-unhard-story/

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महाभारत के युद्ध में कर्ण भले ही अधर्म के पक्ष में खड़े हो परन्तु  उनमे माता कुंती और सूर्य देवता का अंश था. कर्ण ने कई जगहों पर अपने नैतिकता का परिचय दिया था. धमनियों में बहने वाला खून  दूषित पदार्थ के सेवन से कुछ देर के लिए बुद्धि पर हावी होकर इसे दूसरी ओर फेर देता है परन्तु इससे आत्मा सदैव के लिए दूषित नहीं हो जाती. 

आज आप कर्ण के सम्बन्ध में जो कथा सुनने जा रहे इस कथा को पढ़कर आप जानेगें की कौरवों के साथ अधर्म का मार्ग अपनाने के बावजूद कर्ण में नैतिकता जागृत थी. 

महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामाह ने यह शर्त रखी थी की जब तक वह कौरवों के प्रधान सेनापति है तब तक कर्ण कौरवों के पक्ष से युद्ध में हिस्सा नहीं ले सकते. भीष्म पितामह की इस शर्त के कारण विवश कर्ण अपने पड़ाव में बैठे युद्ध का समाचार सुनते रहते और छटपटाते रहते थे. 

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क्या आप जानते है महाभारत युद्ध के इन 18 दिनों के रहस्यों को ? hindi.panditbooking.com/2016/04/mahabharata-mystery/

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माना जाता ही की महाभारत जैसे भीषण युद्ध में एक मात्र जीवित बचने वाला कौरव युतुत्सु था तथा 24,165 कौरव सैनिक लापता हो गये थे.  महाभारत के एक पात्र शल्य , लव कुश के 50 वी पीढ़ी में हुए थे जो महाभारत के युद्ध में कौरवों की पक्ष सेलड़े थे.

शोधानुसार यह ज्ञात किया गया है की जब महाभारत का युद्ध हुआ था तब भगवान श्री कृष्ण की आयु 83 वर्ष थीउन्होंने महाभारत युद्ध के 36  वर्ष बाद अपनी देह त्यागी थी . इस से यह ज्ञात होता है भगवान श्री कृष्ण 119 वर्ष तक धरती मेंविद्यमान रहेउन्होंने  द्वापर युग के अंत एवं कलयुग के आरम्भ में दोनों के संधि के समय अपना मनुष्य शरीर त्यागाज्योतिषिय गणना के अनुसार कलियुग का आरंभ शक संवत से 3176 वर्ष पूर्व की चैत्र शुक्ल एकम (प्रतिपदाको हुआ था.वर्तमान में 1936 शक संवत हैइस प्रकार कलियुग को आरंभ हुए 5112 वर्ष हो गए हैं.

 

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जाने आखिर क्यों भगवान श्री कृष्ण ने “एकलव्य” का किया था वध ? hindi.panditbooking.com/2016/04/krishna-killed-eklavya/

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प्रयाग जो इलहाबाद में स्थित है, महाभारत काल में श्रंगवेरपुर राज्य के नाम से प्रसिद्ध था तथा यह राज्य एकलव्य के पिता और निषादराज हिरण्यधनु का था. उस समय श्रृंगवेरपुर राज्य की शक्ति मथुरा, हस्तिनापुर, मगध, चेदि और चंदेरी आदि साम्राज्यों के समान थी. निषाद हिरण्यधनु और उनके सेनापति गिरीबीर की वीरता विख्यात थी. 
 
श्रृंगवेरपुर के राजा हिरण्यधनु और उनकी रानी सुलेखा के स्नेहांचल में वहां की जनता सुखी और सम्पन्न थी. राजा राज्य का संचालन आमात्य (मंत्री) परिषद की सहायता से करता था. निषादराज हिरण्यधनु को रानी सुलेखा द्वारा एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने “अभिद्युमन” रखा. जब अभिद्युमन थोड़ा बड़ा हुआ तो वह अभय के नाम श्रृंगवेरपुर में जाना जाने लगा. पांच वर्ष की आयु में अभिद्युमन की शिक्षा-दीक्षा कुलिय गुरुकुल में की गयी. 
 
बालपन में ही अस्त्र शस्त्र 

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जाने कैसे इन सरल ज्योतिष उपाय द्वारा पीपल के वृक्ष की पूजा कर आप पा सकते है असीम धन और अपने हर समस्य hindi.panditbooking.com/2016/04/benefits-worshiping-peepal-tree/

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पीपल के वृक्ष के में जो दिव्य देवीय गुण है , उसको हम ज्योतिष नक्षत्रों के योग से मिलाकर विभिन्न प्रकार के लाभ प्राप्त कर सकते है. हिन्दू धर्म के शास्त्रों एवं ग्रंथो के अनुसार पीपल के वृक्ष को दिव्यता से परिपूर्ण माना गया है ज्योतिष शास्त्र में भी यह बताया गया है की पीपल के वृक्ष में असीम दिव्य शक्तियां भरी हुई है.
 
पुराणों में बताई गयी एक कथा के अनुसार लक्ष्मी और उनकी छोटी बहन दरिद्रा भगवान विष्णु के पास गयी तथा उनसे प्राथना करने लगी की हे प्रभु ! हम कहा रहे ? तब भगवान विष्णु ने उन दोनों की इस समस्या को दूर करने के लिए पीपल के वृक्ष को उतपन्न करते हुए लक्ष्मी और दरिद्रा से कहा की आज से तुम्हारा निवास स्थान यह पीपल का वृक्ष होगा. इस तरह वे दोनों पीपल के वृक्ष में रहने लगे. भगवान विष्णु की तरफ से पीपल के वृक्ष को यह वरदान मिला की जो भी व्यक्ति पीपल के वृक्ष की पूजा करेगा, उसे शनि ग्रह के प्रभाव से मुक्ति मिलेगी तथा उस पर देवी लक्ष्मी की अपार कृपा होगी . 
 
भारतीय ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार कुल 28  नक्षत्र होते है परन्तु प्रचलन में केवल 27  नक्षत्र है. इन्ही नक्षत्रों के आधार पर प्रत्येक मनुष्य का उसके जन्म के समय नामकरण होता है अर्थात इन्ही नक्षत्रों के पहले अक्षर के आधार पर मनुष्य का नाम रखा जता है तथा इन नक्षत्रों के अलग-अलग स्वामी ग्रह होते है.
 
हम कैसे उठा सकते है लाभ , अपने नक्षत्रों के आधार पर पीपल के वृक्ष की पूजा कर :- 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक ग्रह 3 नक्षत्रों के स्वामी होते है, तथा हर मनुष्य के नक्षत्र का कोई स्वामी ग्रह होता है. आप अपने नक्षत्र के अनुसार अपने ग्रह के स्वामी को प्रसन्न करने के लिए पीपल के वृक्ष के पूजा की दी गई इस प्रयोग विधि का प्रयोग करें, इससे आपको असीम लाभ की प्राप्ति होगी .

 

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यदि घर पर हो शिवलिंग तो न करें ये कार्य, अन्यथा उठाना पड सकता है नुक्सान ! hindi.panditbooking.com/2016/04/proper-way-shivling-puja/

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यदि आपने महादेव शिव के प्रतीक शिवलिंग को घर में स्थापित किया है तो आपको भी कुछ बातो का विशेष ध्यान रखना होगा क्योकि यदि भगवान शिव भोले है तो उनका क्रोध भी बहुत भयंकर होता है इसी कारण उन्हें त्रिदेवो में संहारकर्ता की उपाधि प्राप्त हुई है. 

शिवलिंग की पूजा यदि सही नियम और विधि-विधान से करी जाए तो यह अत्यन्त फलदायी होती है, परन्तु वहीं यदि शिवलिंग पूजा में कोई त्रुटि हो जाए तो ये गलती किसी मनुष्य के लिए विनाशकारी भी सिद्ध हो सकती है. 

आज हम आपको उन त्रुटियों के बारे में बताने जा रहे है जिनको अपना के आप भगवान शिव के प्रकोप से बचकर उनकी विशेष कृपा और आशीर्वाद अपने ऊपर पा सकते है. 

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जानिये आखिर क्यों भगवान श्री कृष्ण ने पूरी काशी को अपने सुदर्शन चक्र से किया भस्म, तथा कैसे हुआ काशी hindi.panditbooking.com/2016/04/kasi-viswanath-city/

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काशी को हिन्दू धर्म में पूण्य तीर्थ स्थल माना जाता है तथा यह आध्यात्मिक नगरी कहलाती है. इसका उल्लेख अनेक धार्मिक ग्रंथो और पुराणों में मिलता है. परन्तु क्या आप को पता है की काशी जैसी पूण्य भूमि को एक बार भगवान श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से भस्म कर दिया था. आइये जानते है आखिर क्यों भगवान श्री कृष्ण को काशी नगरी को भस्म करना पड़ा. 
 
यह कथा द्वापर युग की है तथा इस कथा का संबंध जरासंध से भी है. मगध का राजा जरासंध अत्यन्त क्रूर था तथा उसके पास असंख्य सैनिक तथा विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र थे. उसकी सेना इतनी शक्तिशाली थी की वह पल भर में ही अनेको बड़े-बड़े सम्राज्यो को धरासायी कर सकती थी.इसलिए अधिकतर राजा जरासंध से डरे रहते

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महादेव शिव का एक लाख छिद्रो वाला दुर्लभ शिवलिंग, एक छिद्र से है पाताल जाने का रास्ता ! hindi.panditbooking.com/2016/04/lakhneshvar-temple-shivling/

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छत्तीसगढ़ की मोक्षदायनी स्थल होने के कारण यहाँ की काशी  तथा पांच ललित कला केंद्रों में से एक कहलाने वाला खरौद नगर में  भगवान शिव का एक बहुत ही दुर्लभ शिवलिंग स्थित है. जो की लक्ष्मणेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है . यह शिवरीनारायण  से 3 किलोमीटर तथा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120  किलोमीटर की दुरी पर स्थित है. रामायण काल से स्थित इस शिव मंदिर में एक शिवलिंग है जिसमे एक लाख छिद्र है, तथा इन छिद्रो में से एक छिद्र पाताल लोक का द्वार खोलता है अर्थात यह छिद्र पाताल लोक की ओर जाने का रास्ता है. 
 
गर्भगृह में है लक्षलिंग :-
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में एक शिवलिंग है जिसके बारे में मान्यता है की इसका निर्माण लक्ष्मण ने किया था. इस शिवलिंग में लाखो छिद्र होने के कारण इसे लक्षलिंग कहा जाता है. इस शिवलिंग में एक छिद्र को पातालगामी कहा जाता है क्योकि इस छिद्र में चाहे कितना भी जल डालो व कभी नहीं भरता है. जबकि उन लाखो छिद्रो में से एक छिद्र को अक्षय कुंड कहा जाता है क्योकि उस में स

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महादेव शिव का एक लाख छिद्रो वाला दुर्लभ शिवलिंग, एक छिद्र से है पाताल जाने का रास्ता ! hindi.panditbooking.com/2016/04/lakhneshvar-temple-shivling/

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छत्तीसगढ़ की मोक्षदायनी स्थल होने के कारण यहाँ की काशी  तथा पांच ललित कला केंद्रों में से एक कहलाने वाला खरौद नगर में  भगवान शिव का एक बहुत ही दुर्लभ शिवलिंग स्थित है. जो की लक्ष्मणेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है . यह शिवरीनारायण  से 3 किलोमीटर तथा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120  किलोमीटर की दुरी पर स्थित है. रामायण काल से स्थित इस शिव मंदिर में एक शिवलिंग है जिसमे एक लाख छिद्र है, तथा इन छिद्रो में से एक छिद्र पाताल लोक का द्वार खोलता है अर्थात यह छिद्र पाताल लोक की ओर जाने का रास्ता है. 
 
गर्भगृह में है लक्षलिंग :-
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में एक शिवलिंग है जिसके बारे में मान्यता है की इसका निर्माण लक्ष्मण ने किया था. इस शिवलिंग में लाखो छिद्र होने के कारण इसे लक्षलिंग कहा जाता है. इस शिवलिंग में एक छिद्र को पातालगामी कहा जाता है क्योकि इस छिद्र में चाहे कितना भी जल डालो व कभी नहीं भरता है. जबकि उन लाखो छिद्रो में से एक छिद्र को अक्षय कुंड कहा जाता है क्योकि उस में स

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जब महावीर हनुमान बने बंधक राम भक्त के हाथो एक लीला को सम्पन्न करने के लिए, जाने हनुमान जी की एक रोचक hindi.panditbooking.com/2016/04/lord-hanuman-story/

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एक बार श्री राम ने अयोध्या में अश्व्मेध यज्ञ करवाया तथा इस यज्ञ में हनुमान भी सम्लित थे, इस यज्ञ को सम्पन्न करने के लिए उन्होंने इस यज्ञ का एक घोडा झोड़ा जो अलग-अलग राज्यों में घूमता हुआ कुंडलपुर पहुंचा. वहां अत्यन्त धर्मात्मा राजा सुरथ का राज्य था . वह हनुमान जी की तरह ही भगवान राम के परम भक्त थे तथा उनके इस भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं धर्मराज ने उन्हें वरदान दिया था की उनकी मृत्यु तब तक नहीं होगी जब तक उन्हें श्री राम के दर्शन नहीं होंगे इस कारण राजा सदैव मृत्यु से निर्भय रहते थे. 

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जाने आखिर क्यों होते है जप के माला में 108 दाने तथा क्यों पड़ती ही माला की जरूरत मन्त्र जाप के लिए ! hindi.panditbooking.com/2016/04/meaning-108-beads-mala/

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हिन्दू सनातन धर्म में अधिकत्तर मन्त्र जापो के समय हमे जप माला ( mala ) की जरूरत होती है तथा इस माला में 108 दाने होते है. हिन्दू धर्म ग्रंथो और शास्त्रों में 108 का अत्यधिक महत्व बताया गया है. इसके पीछे कई धार्मिक, ज्योतिष तथा वैज्ञानिक मान्यताएं है

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जाने आखिर क्या कारण था रावण के भाई कुम्भकर्ण के छः महीने सोने का रहस्य और उससे जुडी कुछ रोचक बाते :- hindi.panditbooking.com/2016/04/kumbhkaran-unknown-facts/

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रामयण  की कथा तो हम अपने बचपन से ही सुनते आ रहे है और इस कथा के मशहूर पात्र राम, लक्ष्मण, दशरथ , देवी सीता, हनुमान और पूरा रावण खादान से भी हम भली भाति परिचित है. परन्तु आज आप रामायण के पात्र कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) जिंसके बारे में निश्चित ही बहुत काम लोग जानते होंगे.

कुम्भकर्ण ( kumbhkaran ) के छः महीने सोने का रहस्य :-
जैसा की आप जानते है रामायण  की कथा अनुसार  में रावण के कनिष्ठ भ्राता कुम्भकर्ण ( kumbhkaran )को ब्र्ह्मा जी का वरदान प्राप्त था की वह छः महीने सोएगा और छः महीन जगेगा. तथा जब रावण को लगा की उसकी सेना अब राम की सेना से युद्ध करने के लिए अपर्याप्त है तो उसने अपने भाई कुम्भकर्ण  को उनका नेतृत्व करने के लिए जगाया जिस कार्य के लिए रावण और उसके सेवको को काफी मुश्क्तिल का सामना करना पड़ा.

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शनि देव को प्रसन्न करने के सरल एवं प्रभावशाली उपाय, जिन्हे अपनाने से मिलती शनि दोष से मुक्ति ! hindi.panditbooking.com/2016/04/%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87/

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यदि यमराज को मृत्यु का देव कहा जाता है तो वही शनि देव भी कर्म के दण्डाधिकारी है. चाहे गलती जान बूझकर की गई हो या अनजाने में हर किसी को अपने कर्मो का दण्ड तो भुगतना ही पड़ता है. यदि किसी व्यक्ति पर शनि देव की साढ़े साती चल रही हो या उसके जन्मकुंडली में शनि अशुभ ग्रह के प्रभाव में हो तो उस व्यक्ति को अनेको परेशनियां घेर लेती है जैसे व्यवसाय में हानि, नौकरी आदि में समस्या, परिवार में मनमुटाव, धन-संचय में कमी, मित्रो के साथ दुश्मनी, कोट-मुकदमा तथा किसी बिमारी से लम्बे समय के लिए ग्रसित हो जाना आदि.

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क्या आपको को पता है महादेव शिव के प्रतीक शिवलिंग के संबंध में ये अनोखी एवं अद्भुत बाते और इसका प्रका hindi.panditbooking.com/2016/04/the-unknown-fact-about-shivling/

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हर शिवालयों या भगवान शिव के मंदिर में आप ने देखा होगा की उनकी आरधना एक गोलाकर पत्थर के रूप में लोगो द्वारा की जाती है जो पूजास्थल के गर्भ गृह में पाया जाता है. महादेव शिव को सिर्फ भारत और श्रीलंका में ही नहीं पूजा जाता बल्कि विश्व में अनेको देश ऐसे है जहाँ भगवान शिव की प्रतिमा या उनके प्रतीक शिवलिंग की पूजा का प्रचलन है . पहले दुनियाभर में भगवान शिव हर जगह पूजनीय थे, इस बात के हजारो सबूत आज भी वर्तमान में हमे देखने को मिल सकते है.

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इस हनुमान जयन्ती पर आजमाए धन प्राप्ति और सभी कष्टों से मुक्ति के ये बहुत ही सरल व शीघ्र प्रभावशाली ट hindi.panditbooking.com/2016/04/apply-these-trick-to-be-richhanuman-jayanti/

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हिन्दू धर्म ग्रंथो और शास्त्रों के अनुसार हनुमान जयन्ती वर्ष में दो बार बताई गई है, पहली चैत्र मास के शुक्ल पूर्णिमा के दिन तथा दूसरी कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन. वाल्मीकि रामयण में हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास की चतुर्दशी को बताया गया है. पुराणों में हनुमान जी के जन्म के संबंध में यह कथा है की अंजना के तपस्या के फलस्वरूप पवन देव ने भगवान शिव के रुद्रावतार हनुमान जी को अंजना के गर्भ में प्रविष्ट करवाया था. हनुमान जी चमत्कारिक सफलता प्रदान करने वाले देवता कहे जाते है इसके साथ ही ये अपने भक्तो द्वारा उनके भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते है.
हनुमान जयन्ती के अवसर पर अपनाए गए टोटको द्वारा हम अपने जीवन के समस्त कष्टों को दूर कर, धन, सुख सम्पति सब कुछ प्राप्त कर सकते है. आइये जानते है इन टोटको के बारे में.

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जानिये जिंदगी भर अधर्म के मार्ग पर चलते हुए भी आखिर कैसे दुर्योधन को स्वर्ग की प्राप्ति हुई ? hindi.panditbooking.com/2016/04/how-duryodhana-got-heaven-after-his-death/

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महाभारत के बारे में कहा जाता है की यह कुरुक्षेत्र के जमीन में लड़ा गया सबसे भीषण युद्ध था जिसमे अनेको योद्धा और सैनिक मारे गए थे. महाभार के भयंकर युद्ध का अनुमान कुरुक्षेत्र के लाल भूमि को देख कर लगाया जा सकता है.

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हनुमान जी के 8 ऐसे रहस्य जिन्हे जानकर आप हो जायेंगे हैरान ! hindi.panditbooking.com/2016/04/8-mysterious-thing-about-lord-hanuman/

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बगैर हनुमान जी के रामयाण कभी पूर्ण नहीं होती तथा रामायण में राम एवं रावण युद्ध में हनुमान जी ही केवल एकमात्र ऐसे योद्धा थे जिन्हे कोई भी, किसी भी प्रकार से क्षति नहीं पहुंचा पाया था. आज हम आपको हनुमान जी के बारे में कुछ नई बाते बताने जा रहे है जिन के बारे में शायद आपने न कभी पढ़ा होगा और न सूना. हनुमान जी के संबंध में 8 अनोखे रहस्य आपको अवश्य ही आश्चर्यचकित होने में मजबूर कर देंगे.

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जाने महादेव शिव के ऐसे चिन्ह, जिन्हे स्वपन में देखने से होती है असीम लाभ की प्राप्ति ! hindi.panditbooking.com/2016/04/what-say-shiva-sign-in-dream/

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यदि किसी मनुष्य के भीतर सकरात्मक ऊर्जा के साथ-साथ सकरात्मक विचार भरे हुए है तो ऐसे व्यक्ति को नींद में आध्यात्मिक स्वपन आते है. इस प्रकार के मनुष्य को यदि स्वपन में भगवान शिव शंकर या उनसे जुड़े जैसे त्रिशूल, डमरू या शिवलिंग आदि संकेत नजर आये तो इसे बहुत शुभ व् लाभकारी माना जाता है. इस प्रकार के व्यक्ति का भाग्य बहुत शीघ्र ही बदलने वाला होता है और उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा होती है. आइये जानते है की क्या है भगवान शिव व उनसे जुडी वस्तुओं को स्वपन में देखने से होने वाले लाभ –

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जाने मृत्यु व आत्मा से जुड़े ऐसे गहरे एवं गुप्त रहस्य जो स्वयं मृत्यु के देव यमराज ने बताए थे नचिकेता hindi.panditbooking.com/2016/04/the-secret-about-death/

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हमारे हिन्दू धर्म में विश्वास है की किसी भी मनुष्य की मृत्यु के पश्चात उस मनुष्य की आत्मा को यमदूतों दवारा यामलोग ले जाया जाता है जहाँ उस आत्मा को मृत्यु के देव व सूर्य पुत्र यमराज का सामना करना पड़ता है, तथा उसके अच्छे या बुरे कर्मो के हिसाब से वह स्वर्ग अथवा नरक पाता है. पुराणिक कथाओ में दो ऐसी कथाएँ मिलती है, जिसमे बताया गया है

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बजरंग बलि की रोचक कथा, जाने श्री कृष्ण संग रची लीला से कैसे तोडा सुदर्शन चक्र, पक्षी राज गरुड़ और स्त hindi.panditbooking.com/2016/04/lord-hanuman-and-krishna-story/

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एक बार भगवान श्री कृष्ण के साथ हमेशा रहने वाले उनके अस्त्र सुदर्शन चक्र, वाहन पक्षी राज गरुड़ और पत्नी सत्यभामा को अभिमान हो गया. सुदर्शन चक्र को अभिमान था अपने सर्व शक्तिमान होने का , पक्षीराज गरुड़ को अपने तेज गति का अभिमान था तथा सत्यभामा को अपने सर्वश्रेष्ठ सुंदरी होने का अभिमान था.

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हिन्दू धर्म गर्न्थो के अनुसार ये है लक्ष्मी ( धन ) प्राप्ति से जुड़े, ” 30 गुप्त संकेत ” ! hindi.panditbooking.com/2016/04/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%82-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8/

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हमारे हिन्दू धर्म में संकेतों को मानने व उन पर विश्वास करने की परम्परा सदियों से प्रचलन में है. धर्म ग्रंथो में बताए गए संकेतों के माध्यम से हम भविष्य में घटित होने वाली घटना के संबंध में पहले से जानकर उन के बारे में सचेत हो सकते है. ये संकेत किसी भी प्रकार के 

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जानिये महादेव शिव के जन्म से जुडी अनसुनी कथाएं तथा उनके बाल्य रूप का वर्णन ! hindi.panditbooking.com/2016/04/story-about-lord-shiva-birth/

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हमारे हिन्दू सनातन धर्म में 18 पुराण है तथा इन सभी पुराणों में भगवानो की उतपत्ति एवं देवी-देवताओ के बारे में कथाएं बताई गयी है. परन्तु इन पुराणों में कुछ समान बातो को छोड़ त्रिदेवो ( ब्र्ह्मा, विष्णु, महेश ) के जन्म के संबंध में अलग-अलग कथाएं प्राप्त होती है. 

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पुराणों में छिपी इस कथा में है शनि देव की दृष्टि के नीचे रहने का रहस्य ! hindi.panditbooking.com/2016/04/story-of-shani-dev/

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एक बार कैलाश पर्वत में हर जगह उत्साह और आनंद का माहौल था व इस उत्साह का कारण था माता पार्वती ( Shiva Parvati ) के पुत्र गणेश का जन्म. महादेव शिव ( Lord Shiva ) और पर्वती को उनके पुत्र गणेश के जन्म की बधाई देने सभी देवता, ऋषि-मुनि,

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माँ के इस मंदिर में तेल या घी नहीं बल्कि पानी से जलता है दिया ! hindi.panditbooking.com/2016/04/miracle-in-goddess-temple/

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माँ भगवती अपने भक्तो पर होने वाले कष्टों को तुरंत हर लेती है तथा माता ने अनेको बार ऐसे चमत्कार भी दिखाए है जिनसे उनके भक्तो की माता के प्रति श्रद्धा और भी अधिक बढ़ जाती है. माता के अनेको अद्भुत चमत्कारों में से एक चमत्कार 

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जाने नवरात्र के नौवें दिन कैसे पूजे माँ दुर्गा के स्वरूप देवी सिद्धिदात्री को ! hindi.panditbooking.com/2016/04/15/how-to-perform-navratri-pooja-at-home/

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नवरात्र ( Navratri ) के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री ( Devi Siddhidatri ) को पूजा जाता है, माता दुर्गा ( Durga ) की नौवीं और अंतिम शक्ति ( Shakti ) देवी सिद्धिदात्री की पूजा ( Navratri Pooja ) से उन्हें प्रसन्न कर मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धियो से सम्पन्न हो सकता है. 

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भीष्म ने युधिस्ठर को बताई थी चार महत्वपूर्ण बाते, जिनसे अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है ! hindi.panditbooking.com/2016/04/14/we-can-avoid-the-premature-death-if-adopted-for-things-in-our-life/

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हर किसी के जन्म से पूर्व ही उसके मृत्यु का निर्धारण हो जाता है इसमें वह कुछ भी नहीं कर सकता क्योकि यही सृष्टि का नियम है. जो इस मृत्युलोक में जन्म लेगा एक न एक दिन उसकी मृत्यु होना तय है. परन्तु प्रसिद्ध हिन्दूधर्म ग्रन्थ महाभारत के अनुसार यह बताया गया है 

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जानिए प्रसिद्ध सूर्य मंदिर कोर्णाक की आश्चर्यचकित करने वाली वास्तुकला के बारे में – Konark Sun Templ hindi.panditbooking.com/2016/04/07/know-about-konark-sun-temple-architecture/

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उड़ीसा राज्य में स्थित कोर्णाक का मंदिर (Konark Sun Temple) अपने अद्भुत एवं अनोखे वास्तुकला के लिए दुनिया भर के प्रसिद्ध मंदिर में से एक है. भगवान सूर्य देव (surya dev of konark temple) को समर्पित यह मंदिर भारत के मध्यकालीन वास्तु

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रामेश्वरम ( Rameshwaram ) हिन्दुओ के सभी पवित्र तीर्थो ( Holy Place ) में से एक है तथा प्रकृति की स hindi.panditbooking.com/2016/04/07/about-kamakhya-temple/

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देवी शक्ति ( Adi Shakti ) के 51 शक्तिपीठों ( 51 Shakti Peeth )  में से एक कमाख्या शक्तिपीठ भारत के असम राज्य में स्थित है. कामाख्या मंदिर असम राज्य के राजधानी दिसपुर के पास गुवाहटी से 10 किलोमीटर दूर नीलाचल पर्वत पर स्थित है. उच्ची पहाड़ी में स्थित कामख्या मंदिर को तांत्रिक महत्व से भी देखा जाता है. कालिका पुराण और शक्ति पुराण में कामाख्या शक्तिपीठ ( Shakti Peeth ) को सर्वोच्च बताया गया है. प्राचीन काल से ही यह एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल रहा है तथा वर्तमान में तांत्रिक लोगो के मन्त्र सिद्ध करने की दृष्टि से यह सर्वोच्च स्थान बन चूका है.

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ज्योतिर्लिंग होने के साथ ही यह है चार पवित्र धाम में से भी एक , रामेश्वरम ! hindi.panditbooking.com/2016/04/07/know-about-rameshwaram-temple/

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रामेश्वरम ( Rameshwaram ) हिन्दुओ के सभी पवित्र तीर्थो ( Holy Place )  में से एक है तथा प्रकृति की सुंदरता के साथ यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है. इसे हिन्दुओ के प्रमुख चार धामों ( Char dham ) में से एक माना जाता है. अद्भुत वास्तुकला से सुस्जित रामेशवरम मंदिर  ( Rameshwaram Temple ) पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केन्द्र है. रामेश्वरम धाम शंख के आकर का एक सुन्दर द्वीप है तथा बंगाल की खाड़ी व हिन्द महासाग

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जाने कैसे पहुंचे तिरुपति बालाजी था तथा कैसे प्राप्त हो उनके दर्शन ! hindi.panditbooking.com/2016/04/08/how-to-reach-tirupati-balaji-temple/

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तिरुपति बालाजी ( Tirupati Balaji ) का मंदिर बेंगलूर से लगभग 260 किलो मीटर की दुरी तथा चेन्नई से लगभग 140 किलो मीटर की दुरी स्थित है. तिरुमाला पर्वत ( Tirumala ) पर आप भगवान बालाजी के दर्शन प्राप्त कर सकते है जो तिरुपति से सात पहाड़ दूर है. ति

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माँ दुर्गा की चौथा स्वरूप है देवी कुष्मांडा, जाने देवी कुष्मांडा को प्रसन्न करने की पूजा विधि ! hindi.panditbooking.com/2016/04/11/devi-kushmanda-in-4th-day-of-navratri/

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नवरात्रे के चौथे ( 4th Day of Navaratri ) दिन माँ दुर्गा ( Durga ) के चौथे रूप देवी कुष्मांडा की पूजा ( Kushmanda Devi Puja ) की जाती है. देवी कुष्मांडा के नाम के पीछे का रहस्य यह है की जब पूरा ब्रह्माण्ड चारो ओर से अंधकार से घिरा हुआ था तथा कही पर भी जीवन का नामो-निशान नहीं था तब आदिशक्ति दुर्गा ने अपने चौथे स्वरूप द्वारा सृष्टि की सरंचना की जिस कारण उनके चौथे रूप को कुष्मांडा नाम दिया गया. 

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आइये जाने क्या है मुहूर्त तथा इसकी महत्ता ! hindi.panditbooking.com/2016/04/11/the-importance-of-muhurat/

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हमारे हिन्दू धर्म ( Hindu Dharma ) में मान्यता है की कोई भी शुभ कार्य एक विशेष शुभ मुहूर्त ( Shubh Muhurat ) पर ही किया जाना चाहिए तथा इसके लिए हम अपने पंडित जी से सलाह लेते है. परन्तु क्या वास्तविकता में मुहूर्त ( Muhurat ) का प्रभाव हम पर पड़ता है और क्या ये सच में कारगर होता है. आइये जानते मुहूर्त के बारे में तथा क्या महत्व रखते है 

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जाने देवी दुर्गा के नवरात्र के सबसे पहले व्रतों को करने वाली भक्त की कथा ! hindi.panditbooking.com/2016/04/11/navratri-vrat-ktha/

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नवरात्रि एक ऐसा पर्व है जो हिन्दू धर्म गर्न्थो और पुराणों में माता की आराधना के लिए सर्वेष्ठ बताया गया है. नवरात्रियों में भक्त माता की आराधना से उन्हें प्रसन्न कर मनवांछित फल प्राप्त कर सकते है. नवरात्रो में माता दुर्गा के नौ रूपों को प्रसन्न किया जाता है तथा भक्तो द्वारा उपवास रखे जाते है .

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नवरात्री के पांचवे दिन इस तरह करें माँ दुर्गा के पांचवे रूप स्कन्द माता की पूजा ! hindi.panditbooking.com/2016/04/12/navratri-puja-vidhi-in-hindi-2/

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उन्होंने दुष्ट ताडिकासुर का वध कर देवताओ को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी. भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण माँ दुर्गा ( Maa Durga) के एक रूप का नाम कार्तिकेय के स्कन्द नाम पर स्कन्द माता पडा. स्कन्द माता सुख-शांति प्रदान करने वाली देवी है

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तिरुपति बालाजी का मंदिर व इसका इतिहास ! hindi.panditbooking.com/2016/04/12/tirupati-balaji-temple-history/

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विश्व भर में प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी का मंदिर ( Tirupathi Temple ) दक्षिण भारत के चित्तूर जिले में तिरुमाला पहाड़ पर स्थित है. हर साल करोड़ो श्रृद्धालु दूर-दूर से तिरुपति बालाजी ( Tirupati Balaji ) के दर्शन के लिए आते हैं , साल के हर महीने मंदिर में श्रृद्धालुओ का ताँता लगा रहता है. 

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करें इस नवरात्री दुर्गा सप्तशती के इन 11 अचूक मंत्रो का जप, हर मनोकामना होगी पूरी ! hindi.panditbooking.com/2016/04/12/durga-saptashati-mantra/

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हिन्दू धर्म ग्रंथो में दुर्गा सप्तशती के मंत्रो महिमा का गुणगान करते हुए बताया गया है की इनके प्रभाव से सुख व शांति मिलती है तथा मनोवांच्छित फल प्राप्त होते है. माँ दुर्गा के पावन पर्व नवरात्र में यदि दुर्गा सप्तशती के मंत्रो का जाप सही प्रकार व विधि विधान से कि

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नवरात्र के छठे दिन माँ भगवती के षष्ठम रूप देवी कात्यानी की ऐसे करे पूजा ! hindi.panditbooking.com/2016/04/13/how-to-perform-katyayani-puja-at-home/

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नवरात्रि ( Navratri Festival ) के छठे दिन देवी दुर्गा ( Durga )के छठे रूप देवी कात्यायनी ( Katyayani Devi ) की पूजा होती है, माता अपने भक्तो पर बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाती है तथा उनके हर मुराद को पूरी करती है. देवी दुर्गा ( Devi Durga ) ने ऋषि कात्या

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आखिर क्यों प्रिय था भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख ! hindi.panditbooking.com/2016/04/13/why-shri-krishna-wear-peacock-feather/

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भगवान श्री कृष्ण का नाम मुंह में आते ही हमारे आँखो के सामने उनके सुन्दर बाल छवि या उनके युवा छवि का चेहरा समाने आ जाता है. श्री कृष्ण के हर छवि में उनके मष्तक पर मोर पंख शोभायमान होता है. भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख इतना पसंद

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कब हुआ था सोमनाथ मंदिर का निर्माण और क्या है इसका इतिहास ! hindi.panditbooking.com/2016/04/13/somnath-temple-history-in-hindi/

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भगवान शिव का सोमनाथ मंदिर ( Somnath Temple ) गुजरात के वेरावल बंदरगाह में स्थित है. सोमनाथ मंदिर हिन्दुओ का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है 

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नवरात्री के सातवें दिन जाने कैसे करे माँ भगवती के सातवें स्वरूप को प्रसन्न ! hindi.panditbooking.com/2016/04/14/how-to-perform-navratri-pooja/

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नवरात्री ( Navratri ) के सातवें दिन माता भगवती के सातवें स्वरूप माँ काली ( Devi kali ) की पूजा-आराधना की जाती है.